|
يكاد يمسكه
عرفان راحته |
|
ركن الحطيم اذا
ما جاء يستلم |
|
يغضي حياء ويغضى
من مهابته |
|
فلا يكلم إلا
حين يبتسم |
|
بكفه خيزران
ريحها عبق |
|
من كف أروع في
عرينينه شمم |
|
من جده دان فضل
الأنبياء له |
|
وفضل أمته دانت
له الامم |
|
ينشق نور الهدى
عن نور غرته |
|
كالشمس تنجاب عن
اشراقها الظلم |
|
مشتقة من رسول
الله نبعته |
|
طابت عناصرها
والخيم والشيم |
|
هذا ابن فاطمة
ان كنت جاهله |
|
بجده انبياء
الله قد ختموا |
|
الله شرفه قدما
وفضله |
|
جرى بذاك له في لوحه
القلم |
|
فليس قولك من
هذا بضائره |
|
العرب تعرف من
انكرت والعجم |
|
كلتا يديه غياث
عم نفعهما |
|
يستو كفان ولا
يعروهما عدم |
|
حمال اثقال
أقوام اذا فدحوا |
|
حلو الشمائل
تحلو عنده نعم |
|
لا يخلف الوعد
ميمون نقيبته |
|
رحب الفناء أريب
حسين يعتزم |
|
من معشر حبهم
دين وبغضهم |
|
كفر وقربهم منجى
ومعتصم |
|
إن عد أهل التقى
كانوا أئمتهم |
|
أو قيل من خير
أهل الارض قيل هم |
|
لا يستطيع جواد
بعد غايتهم |
|
ولا يداينهم قوم
وإن كرموا |
|
هم الغيوث إذا
ما ازمة ازمت |
|
والاسد أسد
الشرى والبأس محتدم |
|
لا ينقص العسر
بسطا من اكفهم |
|
سيان ذلك ان
أثروا وان عدموا |
|
يستدفع السوء
والبلوى بحبهم |
|
ويسترد به
الاحسان والنعم |
|
مقدم بعد ذكر
الله ذكرهم |
|
في كل أمر
ومختوم به الكلم |
|
يأبى لهم أن يحل
الذل ساحتهم |
|
خيم كريم وأيد
بالندى هضم |
|
أي الخلائق ليست
في رقابهم |
|
لاولية هذا أولا
نعم |
|
من يشكر الله
يشكر أولية ذا |
|
فالدين من بيت
هذا بابه الامم |
وثار هشام وود أن الارض قد خاست به ، ولا يسمع هذه القصيدة
![حياة الإمام محمّد الباقر عليه السلام دراسة وتحليل [ ج ١ ] حياة الإمام محمّد الباقر عليه السلام دراسة وتحليل](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F613_haiat-emam-bagher-01%2Fimages%2Fcover.jpg&w=640&q=75)
