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افکند بس ز خصم سر و دست توسنش |
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ننهاد جز بدست و سر دشمنان قدم |
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ناگاه ظالمى ز کمين تيغ زد بر او |
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افتاد دست راست از آن جسم محترم |
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با دست چپ زدى ز چپ و راست بر عدو |
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آرا نبود باک از اين صدم او الم |
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واحسرتا که دست چپش هم زين فتاد |
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از ضرب تيغ دشمن بدخواه بد شِيَم |
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افتاد تا که از تن آن شهسوار دست |
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بگشود خصم او ز يمين و يسار دست |
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ناچار شد دچار اجل تن بمرگ داد |
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بىدست چون جدال کند با هزار دست |
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آن مير نامدار بدندان گرفت مشک |
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دندان معين شود چه بيفتد ز کار دست |
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دشمن کمان گشود بسويش ز چار سو |
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بر مشک آب تير و بگل يافت خار دست |
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جسم شريف او هدف تير و نيزه شد |
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باد سموم يافت بر آن لالهزار دست |
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از ضربت عمود خشک گشت غرق خون |
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بر چهرهٔ ماه يافت خسوف غبار دست |
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![فرسان الهيجاء في تراجم أصحاب سيّد الشهداء عليه السلام [ ج ١ ] فرسان الهيجاء في تراجم أصحاب سيّد الشهداء عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F1541_farsan-alhaijae%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)