على قومه حتى افتقروا وهربوا في البيداء ، وليس عندهم إلاّ إبل مهزولة يقول :
|
أخليفة الرّحمن!
إنّا معشر |
|
حنفاء نسجد بكرة
وأصيلا |
|
إنّ السّعاة
عصوك يوم أمرتهم |
|
وأتوا دواهي لو
علمت وغولا |
|
أخذوا العريف
فشقّقوا حيزومه |
|
بالأصبحيّة
قائما مغلولا (١) |
|
حتّى إذا لم
يتركوا لعظامه |
|
لحما ولا لفؤاده
معقولا (٢) |
|
جاءوا بصكّهم
وأحدب أسأرت |
|
منه السّياط
يراعة إجفيلا (٣) |
|
أخذوا حمولته
فأصبح قاعدا |
|
لا يستطيع عن
الدّيار حويلا |
|
يدعو أمير
المؤمنين ودونه |
|
خرق تجرّ به
الرّياح ذيولا (٤) |
|
كهداهد كسر
الرّماة جناحه |
|
يدعو بقارعة
الشّريف هديلا |
|
أخليفة الرّحمن!
إنّ عشيرتي |
|
أسبى سوامهم
عزين فلو لا (٥) |
|
قوم على الإسلام
لمّا يتركوا |
|
ما عونهم
ويضيّعوا التّهليلا (٦) |
|
قطعوا اليمامة
يطردون كأنّهم |
|
قوم أصابوا
ظالمين قتيلا |
|
شهري ربيع ما
تذوق لبونهم |
|
إلاّ حموضا وخمة
وذبيلا (٧) |
|
وأتاهم يحيى
فشدّ عليهم |
|
عقدا يراه
المسلمون ثقيلا (٨) |
__________________
(١) الحيزوم : وسط الظهر. الأصبحيّة : السياط.
(٢) المعقول : الادراك.
(٣) أسأرت : أي بقيت في الإناء بقيّة. الأجفيل : الخائف.
(٤) الخرق : الصحراء الواسعة.
(٥) عزين : الجماعات.
(٦) الماعون : أراد به الزكاة.
(٧) الحموض : المرّ المالح من النبات.
(٨) يحيى : هو أحد السعاة الظالمين.
![موسوعة الإمام أميرالمؤمنين علي بن أبي طالب عليه السلام [ ج ١٠ ] موسوعة الإمام أميرالمؤمنين علي بن أبي طالب عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F390_mosoaimamali-10%2Fimages%2Fcover.jpg&w=640&q=75)