|
فلما أن راى
الأعداء كل |
|
كليم القلب يطلب
بالذحول |
|
تصدى للقتال ومر
يسطو |
|
على الأبطال
كالليث الصؤول |
|
فيا لله كم قد
فل جمعاً |
|
بحد حسامه العضب
الصقيل |
|
إلى أن جاءه
الأجل المسمى |
|
فخر مجدلاً تحت
الخيول |
|
فأقبلن الكرائم
حاسرات |
|
نوادب للمحامي
والكفيل |
|
وزينب بينهن
عليه تذرى |
|
عقيق الدمع في
الخد الأسيل |
|
وتدعو أمها
الزهراء شجواً |
|
ومنها القلب في
داء دخيل |
|
ألا يا بضعة
المختار طه |
|
من الأجداث قومي
واندبي لي |
|
ونوحي للغريب
المستظـ |
|
ـام البعيد
النازح الدار القتيل |
|
يعز عليك يا
أماه ما قد |
|
تطوقنا من الخطب
الجليل |
|
ألا يا أم كلثوم
هلمي |
|
لقد نادى
المنادي بالرحيل |
|
وجاءت فاطم
الصغرى تنادي |
|
أباها وهي تعلن
بالعويل |
|
أبي عز الكفيل
فهل ترى لي |
|
فديتك يا بن
فاطم من كفيل |
|
أبي أحرقتني
بجفاك فامنن |
|
علي بنظرة تطفي
غليلي |
|
أبي إن ابنك
السجاد أضحى |
|
عليلاً لهف نفسي
للعليل |
|
أيسلمني الزمان
وأنت كهفي |
|
وتألمني الخطوب
وأنت سولي |
|
مصابك يابن
فاطمة كساني |
|
ثياب الهم
والحزن الطويل |
|
وخبطك هد أركان
المعالي |
|
وثل قواعد المجد
الأثيل |
|
واذكى جمرة في
قلب طه |
|
ومهجة حيدر وحشا
البتول |
|
ألا يابن
الأطائب من قريش |
|
وخير الخلق من
بعد الرسول |
|
ويا ابن الأكرمين
ومن بكته |
|
السموات العلى
بدم همول |
|
إليك خريدة
حسناء رقت |
|
وراقت بهجة لذوي
العقول |
|
تؤم حماك قاصدة
ومنها |
|
دموع العين
كالغيث الهطول |
|
بها يرجو غدات
الحشر منكم |
|
سليلك باقر خير
القبول |
|
وتنقذه من
النيران فيها |
|
وتنقله إلى ظل
ظليل |
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ٦ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F373_adab-altaff-06%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

