|
ذللا على
الأبواب لا |
|
يعدون إذنا
للدخول |
|
أبداً بسر الوحي |
|
تهتف بالصعود
وبالنزول |
|
عرف الذبيح بهم
وما |
|
عرفت قريش
بالفضول |
|
من مالك خير
البطون |
|
وصنوه خير
القبيل |
|
من هاشم البطحاء
لا |
|
سلفي نمير أو
سلول |
|
من راكبي ظهر
البراق |
|
وممتطي قب
الخيول |
|
من خارقي السبع
الطباق |
|
ومخرسي العشر
العقول |
|
من آل أحمد رحمه |
|
الأدنى ومغرسه
الأصيل |
|
ركبوا إلى العز
المنون |
|
وجانبوا عيش
الذليل |
|
وردوا الوغى
فقضوا وليس |
|
تعاب شمس
بالأفول |
|
هيهات ما الصبر
الجميل |
|
هناك بالصبر
الجميل |
|
او ما سمعت ابن
الببتولة |
|
لو دريت ابن
البتول |
|
إذ قادها شعث |
|
الننواصي عاقدات
للذيول |
|
طلق الأعنة
عاطفات |
|
بالرسيم على
الذميل |
|
يطوي بها متن
الوعور |
|
معارضا طي
السهول |
|
متنكب الورد
الذميم |
|
مجانب المرعى
الوبيل |
|
طلاب مجد
بالحسام |
|
العضب والرمح
الطويل |
|
متطلباً أقصى
المطالب |
|
خاطب الخطب
الجليل |
|
يحدو مأثر
قاصراً |
|
عن منتهاها كل
طول |
|
شرف تورث عن وصي |
|
أو أخي وحي رسول |
|
ضلت أمية ما
تريد |
|
غداة مقترع
النصول |
|
رامت تسوق
المصعب الهدار |
|
مستاق الذلول |
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ٦ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F373_adab-altaff-06%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

