|
لهفي لهاتيك
الستور تهتكت |
|
ما بين أهل
الكفر والالحاد |
|
لهفي لهاتيك
الصوارم فللت |
|
بقراع صمّ
للخطوب صلاد |
|
لهفي لهاتيك
الزواخر أصبحت |
|
غوراً وكنّ منازل
الوراد |
|
لهفي لهاتيك
الكواكب نورها |
|
في الترب أخمد
أيّما اخماد |
|
فلبئسما جزوا
النبي وبئسما |
|
خلفوه في
الأهلين والأولاد |
|
يا عين إن أجريت
دمعاً فليكن |
|
حزناً على سبط
النبي الهادي |
|
وذري البكا إلا
بدمع هاطل |
|
كالسيل حطّ إلى
قرار الوادي |
|
واحمي الجفون
رقادها لمن احتمت |
|
أجفانه بالطف
طعم رقاد |
|
تالله لا أنساه
وهو بكربلا |
|
غرض يصاب باسهم
الأحقاد |
|
تالله لا أنساه
وهو مجاهد |
|
عن آله الأطهار
أيّ جهاد |
|
فرداً من الخلان
ما بين العدى |
|
خلواً من
الأنصار والأنجاد |
|
لهفي له والترب
من عبراته |
|
ريان والأحشاء
منه صوادي |
|
يدعو اللئام ولا
يرى من بينهم |
|
أحداً يجيب نداه
حين ينادي |
|
يا أيها الأقوام
فيم نقضتم |
|
عهدي وضيعتم
ذمام ودادي |
|
ويجول في
الابطال جولة ضيغم |
|
ظام الى مهج
الفوارس صادي |
|
أردوه عن ظهر
الجواد كأنما |
|
هدموا به طوداً
من الاطواد |
|
يا غائباً لا
ترتجى لك أوبة |
|
أسلمتني لجوى
وطول سهاد |
|
صلى عليك الله
يا ابن المصطفى |
|
ما سار ركب أو
ترنم حادي |
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ٥ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F367_adab-altaff-05%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

