محمد الخليلي
المتوفى ١٣٨٨
|
ان كنت تحزن
لادكار قتيل |
|
فاحزن لذكرى
مسلم بن عقيل |
|
واجزع لنازلة
بخير مفضل |
|
أبكى عيون الفضل
والتنزيل |
|
واندب قتيلا ما
انجلى ليلى الوغى |
|
أبدا له عن مشبه
وبديل |
|
هو ليث غالب
مسلم من أسلمت |
|
مهج العدى
لفرنده المصقول |
|
شهم تحدر من
سلالة هاشم |
|
خير البيوت على
وخير قبيل |
|
متفرعا من دوحة
مضرية |
|
تنمى لاصل في
الفخار أصيل |
* * *
|
أم العراق مبلغا
برسالة |
|
أكرم بمرسله
وبالمرسول |
|
وأتى الى كوفان
ينقذ أمة |
|
طلبت اغاثتهم
على تعجيل |
|
فاكتض مسجدها
بهم وعلت به |
|
أصواتهم بالحمد
والتهليل |
|
وتقاطروا مثل
الفراش تهافتا |
|
طلبا لبيعته على
التنزيل |
|
يفدونه بنفيسهم
والنفس لا |
|
يبغون دون رضاه
أي بديل |
|
باتوا وبات مؤملا
للنصر من |
|
أشياخهم يا خيبة
المأمول |
|
لكنهم ما أصبحوا
حتى غدا |
|
في مصرهم لا
يهتدي لسبيل |
|
خذلوه اذ عدلوا
الى ابن سمية |
|
واستبدلوا
الارشاد بالتضليل |
|
وتجمعوا لقتاله
من بعدما |
|
عرفوه للارشاد
خير دليل |
|
وأتوه منفردا
بمنزل طوعة |
|
وقلوبهم تغلي
بنار ذحول |
|
فغدا يفرق جمعهم
ويفرق الابطال |
|
في عزم له مسلول |
|
يلقى الكماء
بعزمة مضرية |
|
اجمالها يغني عن
التفصيل |
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ١٠ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F384_adab-altaff-10%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

