|
يمضي اذا ازدحم
الكماة وقد |
|
كهم الضبا وتقصف
الأسل |
|
ويخوض نار الحرب
مضرمة |
|
فكأنما هي بارد
علل |
|
وشمر دل وصل
الثناء به |
|
غاياته ولأحمد
يصل |
|
بسحاب صعدته
وراحته |
|
غيثان منبعث
ومنهمل |
|
وبيوم معركة
ومكرمة |
|
أسد هزبر وعارض
هطل |
|
وسرت تحوط فتى
عشيرتها |
|
من آل أحمد فتية
نبل |
|
وتحف من أشرافها
بطلا |
|
شهد الحسام بأنه
بطل |
|
وأشم خلق للعلاء
به |
|
نسب بحبل العرش
متصل |
|
ذوالمجد ليس يحل
ساحته |
|
وجل وقلب عدوه
وجل |
|
وأخو المكارم لا
بواردها |
|
ظمأ ولا لغزيرها
وشل |
|
أبدا فلا اللاجي
به وجل |
|
كلا ولا الراجي
له خجل |
|
والمستقاد له
جبابرة الاشر |
|
راك وهي لعزه
ذلل |
|
ومقوضين تحملوا
وعلى |
|
مسراهم المعروف
مرتحل |
|
ركبوا الى العز
الردى وحدا |
|
للموت فيهم سايق
عجل |
|
وبهم ترامت
للعلى شرفا |
|
ابل المنايا
السود لا الابل |
|
حتى اذا بل
المسير بهم |
|
أقصى المطالب
وانتهى الامل |
|
نزلوا بأكناف
الطفوف ضحى |
|
والى الجنان
عشية رحلوا |
|
بأماجد من دونهم
وقفوا |
|
وبحبهم أرواحهم
بذلوا |
|
وعلى الظما
وردوا بأفئدة |
|
حرى كأن لها
الضبا نهل |
|
في موكب تكبوا
الاسود به |
|
ويزل من زلزاله
الجبل |
|
فاض النجيع
وخيلهم سفن |
|
وحمى الوطيس
وسمرهم ظلل |
|
وعجاجة كالليل
يصدعها |
|
من قضبهم
ووجوههم شعل |
|
حتى اذا رامت
بقاءهم الـ |
|
ـدنيا ورام
نداهم الاجل |
|
بخلوا على
الدنيا بأنفسهم |
|
وعلى الردى
جادوا بما بخلوا |
|
وعن ابن فاطم
للعدى كرما |
|
أجسامهم شبح
القنا جعلوا |
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ٧ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F374_adab-altaff-07%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

