|
ومن على أعتابها
تخضع الا |
|
ملاك يقفو
الموكب الموكبا |
|
خواضع بين العدى
لم تجد |
|
من ذلة الاسر
لها مهربا |
|
عز على الاملاك
والرسل ان |
|
تمسي لابناء
الخنا منهبا |
|
تود لو أن الدجى
سرمدا |
|
لما عن الرائي
لها غيبا |
|
وان بدا الصبح
دعت من أسى |
|
يا صبح لا أهلا
ولا مرحبا |
|
أبديت يا صبح
لنا أوجها |
|
لها جلال الله
قد حجبا |
|
تراك قد هانت
عليك التي |
|
عن شأنها القرآن
قد أعربا |
|
فما جنى يا شمس
جان كما |
|
جنيت في حرات آل
العبا |
|
الليل يكسوها
حذارا على |
|
أوجهها من دجنة الغيهبا |
|
وأنـ تبديها
لنظارها |
|
فمن جنى مثلك أو
أذنبا |
|
لم لا تواريت
بحجب الخفا |
|
للبعث لما آن أن
تسلبا |
|
يا هاشم العليا
ولا هاشما |
|
الخطب قد أعضل
واعصوصبا |
|
ما آن لا بعدا
لاسيافكم |
|
من هامر الاوداج
ان تشربا |
|
لا عذر أو تجتاح
أعداءكم |
|
أراقم المران أو
تعطبا |
|
أو تنعل الافراس
من هم من |
|
رام على علياك
أن يشغبا |
|
جافي عن الاسياف
اغمادها |
|
وواصلي بين
الطلا والشبا |
|
حتى تبيدي أو
تبيدي العدى |
|
الله في ثارك أن
يذهبا |
|
ولا تملي من
قراع الردى |
|
أو يجمع الشمل
الذي شعبا |
|
ما صد أسماعكم
عن ندى |
|
زينب والهفا على
زينبا |
|
وقد درت أن لا
ملب لها |
|
لكن حداها الثكل
أن تندبا |
|
تندب واقوماه من
هاشم |
|
لنسوة لها السبا
اذهبا |
|
هذي بنات الوحي
لم تلف من |
|
كل الورى ملجا
ولا مهربا |
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ٧ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F374_adab-altaff-07%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

