|
تحكّم فيهم كل أنوك جاهل |
|
ويُغزون غزواً ليس فيه محاد |
|
كأنهم ارتدّوا ارتداد
امية |
|
وحادوا كما حادت
ثمود وعاد |
|
ألم تُعظِموا يا
قوم رهط نبيكم |
|
أما لكم يوم
النشور معاد |
|
تداس بأقدام
العصاة جسومهم |
|
وتدرسهم جُرد
هناك جياد (١) |
|
تضيمهم بالقتل
أمة جدهم |
|
سفاها وعن ماء
الفرات تذاد |
|
فماتوا عطاشى
صابرين على الوغى |
|
ولم يجبنوا بل
جالدوا فأجادوا |
|
ولم يقبلوا حكم
الدعي (٢) لأنهم |
|
تساما وسادوا في
المهود وقادوا |
|
ولكنم ماتوا
كراما أعزة |
|
وعاش بهم قبل
الممات عباد |
|
وكم بأعالي
كربلا من حفائر |
|
بها جُثتُ
الأبرار ليس تعاد |
|
بها من بني
الزهراء كل سَميدعٍ |
|
جواد اذا أعيا
الأنام جواد |
|
معفرة في ذلك
الترب منهم |
|
وجوه بها كان
النجاح يفاد |
|
فلهفي على قتل
الحسين ومسلم |
|
وخزي لمن
عاداهما وبعاد |
|
ولهفي على زيد
وبَثّاً مُرددا |
|
إذا حان من بثّ
الكئيب نفاد |
|
الاكبد تفنى
عليهم صبابة |
|
فيقطر حزنا أو
يذوب فؤاد |
|
ألا مُقلة تهمي
ألا أذن تعي |
|
أكل قلوب
العالمين جماد |
|
تُقاد دماء
المارقين ولا أرى |
|
دماءَ بني بيت
النبي تُقاد |
|
أليس هم الهادون
والعترة التي |
|
بها انجاب شرك
واضمحل فساد |
|
تساق على
الارغام قسراً نساؤهم |
|
سبايا الى ارض
الشام تقاد |
|
يُسقنَ الى دار
اللعين صوغرا |
|
كما سيق في عصف
الراح جراد |
|
كأنهم فيء
النصارى وإنهم |
|
لأكرم من قد عزّ
منه قياد |
|
يعز على الزهراء
ذلّة زينب |
|
وقتلُ حسين
والقلوب شداد |
|
وقرع يزيد
بالقضيب لسنّه |
|
لقد مجسوا (٣) أهل الشام
وهادوا |
__________________
١ ـ يعني بذلك رضّ جسد الحسين عليهالسلام بحوافر الخيول.
٢ ـ يعنى به ابن زياد الذي لا يعرف لابيه أب.
٣ ـ مجسوا : دخلوا المجوسية. وهادوا : دخلوا اليهودية.
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ٢ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F318_adab-altaff-02%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

