|
فتلوا وما قتلوا
وعند |
|
هم لنا قَودٌ
وعقل |
|
قل للذين على
مواعدهم |
|
لنا خُلفٌ ومطل |
|
كم ضامني من لا
أضيم |
|
وملّني مَن لا
أمَلّ |
|
يا عاذلاً
لعتابه |
|
كَلّ على سمعي
وثِقل |
|
ان كنت تأمر
بالسلو |
|
فقل لقلبي كيف
يسلو |
|
قلبي رهين في
الهوى |
|
ان كان قلبك منه
يخلو |
|
ولقد علمتُ على
الهوى |
|
أنّ الهوى سقمٌ
وذلٌ |
|
وتعجبتُ جَملٌ
لشيب |
|
مفارقي وتشيبُ جمل |
|
ورأت بياضاً في
سواد |
|
ما رأته هناك
قَبل |
|
كذُبالة رفعت
على |
|
الهضبات السارين
ضلّوا |
|
لا تنكريه ـ ويب
غيرك |
|
فهو للجُهلاء
غُلّ (١) |
وله قدس الله سره :
|
مولاي يا بدر كل
داجية |
|
خذ بيدي قد وقعت
في اللجج |
|
حسنك ما تنقضي
عجائبه |
|
كالبحر حدّث عنه
بلا حرج |
|
بحق من خط
عارضيك ومَن |
|
سلّط سلطانها
على المهج |
|
مدّ يديك
الكريمتين معاً |
|
ثم ادع لي من
هواك بالفرج |
وقوله :
|
ولما تفرقنا كما
شاءت النوى |
|
تبيّن ودّ خالصٌ
وتوددُ |
|
كأني وقد سار
الخليط عشيةً |
|
أخو جنّةٍ مما
أقوم وأقعد |
وله من قصيدة :
|
الا يا نسيم
الريح من أرض بابل |
|
تحمّل الى أهل
الخيام سلامي |
|
وقل لحبيب فيك
بعض نسيمه |
|
أما آن تسطيع
رجع كلامي |
__________________
١ ـ ويب : كلمة ويل زنة ومعنى. والغل بالضم : طوق من حديد يجعل في اليد.
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ٢ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F318_adab-altaff-02%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

