|
( فوقى النبي ببذل مهجته |
|
وبأعين الكفار منجده ) |
|
وهو الذي أتبع
الهدى يفعاً |
|
لم يستمله عن
التقى دده |
|
كهل التاله وهو
مقتبل |
|
في الشرخ غض
الغصن أغيده |
|
والشرك يُعبد
عزياه به |
|
جهلا دعائمه
وجلمده |
|
ومنازل الاقران
قد علموا |
|
والنقع مُطرّق
تلبّده |
|
خواض غمرة كل
معترك |
|
سيان أليسه
ورعدده |
|
فسقى الوليد
بكاس منصله |
|
كأسا توهله
وتصخده |
|
فهوى يمج نجيع
حشرته |
|
والموت يلفته
ويقصده |
|
وسما بأحد
والقنا قصد |
|
كالليث أمكنه
تصيّده |
|
فأباد أصحاب
اللواء فلم |
|
يترك له كفّا
تُسنّده |
|
ثم ابن عبد يوم
أورده |
|
شربا يذوق الموت
وُرّده |
|
جزع المداد
فذاده بطل |
|
لله مرضاه
ومعتده |
|
وحصون خيبر إذ
أطاف بها |
|
لم يثنه عن ذاك
صُدّده |
|
ونجم قد عقد
الولاء له |
|
عقدا يُقَلقَل
منه حُسّده |
|
ما نال في يوم
مدى شرف |
|
إلا أبر فزاده
غده |
|
من ذا يساجل أو
يُناجب في |
|
نسب رسول الله
محتده |
|
أبناء فاطمة
الذين اذا |
|
مجد اشار به
مُعدّده |
|
فذراهم مرعى
هوامله |
|
ولديه منشأه
ومولده |
|
والمجد يعلم أن
أيديهم |
|
عنها اذا قادته
مقوده |
|
لولاهم كان
الورى همجا |
|
كالبهم فرّقه
مشرّده |
|
لولاهم حار
السبيل بنا |
|
عما نحاوله
ونقصده |
|
لولاهم استولى
الضلال على |
|
منهاجنا واشتد
موصده |
|
هم حجة الله
التي كندت |
|
والله ينعم ثم
تكنده |
|
هم ظل دين الله
مدّده |
|
أمناً على الدنيا
ممدده |
|
وهم قوام لا
يزيغ اذا |
|
ما مال ركن
الدين يعمده |
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ٢ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F318_adab-altaff-02%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

