|
اشتاقكم حتى اذا
نهض الهوى |
|
بي نحوكم قعدت
بي الآلام |
|
لم أنسكم فاقول
اني ذاكر |
|
نسيان ذكركم
عليّ حرام |
|
والله لو اني
شرحت ودادكم |
|
فَنيَ المداد
وكلّت الاقلام |
|
اني اميل لوصلكم
وحديثكم |
|
ويزيدني في
الذكر منه هيام |
|
واذا بدا إلفان
ألفتني بكم |
|
حسر كما يتحسّر
الايتام |
|
وتألف الأرواح
حظ لم يكن |
|
ليتمّ أو تتألف
الأجسام |
|
لله ايام اذا
مثلتها |
|
فكأنها من طيبها
احلام |
|
والدهر ليس
بسالم من ريبه |
|
أحدٌ وليس لنفسه
استسلام |
|
أخنى على آل
النبي بصرفه |
|
فتحكّمت فيهم له
أحكام |
|
فعراصهم بعد
دراسة والهدى |
|
دُرُسٌ تجاوب في
ثراها الهام |
|
وهُم عماد الدين
والدنيا وهم |
|
للحق ركن ثابت
وقوام |
|
منهم أمير النحل
والمولى الذي |
|
هو للشريعة معقل
ونظام |
|
وهو الامام لكل
من وطأ الحصا |
|
بعد النبي وما
عليه امام |
|
يغني العفاة عن
السؤال تكرّما |
|
فينيلهم أضعاف
ما قد راموا |
|
أمواله للسائلين
غنيمة |
|
وله بأخذهم لها
استغنام |
|
واذا تحزّم
للبراز تقطعت |
|
ايدي الحروب فما
يشدّ حزام |
|
واذا انتضى
اسيافه في مأزق |
|
فغمودهن من
الكماة الهام |
|
واذا رنا نحو
الشجاع بطرفه |
|
فلحاظه في
لُبّتّيهِ سهام |
|
واذا الحروب
توقّدت نيرانها |
|
ولها بآفاق
السماء ظلام |
|
فالبيض شمس
والأسنة أنجم |
|
والنقع ليل
فوقهن ركام |
|
حتى اذا ما قيل
حيدرة أتى |
|
خفتوا فلم يسمع
هناك كلام |
|
لا يملكون
تزيّلا عنه كأن القوم |
|
لم تخلق لها
اقدام |
|
وكأن هيبته قيود
عداته |
|
لا خلف ينجيهم
ولا قدّام |
![أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام [ ج ٤ ] أدب الطّف أو شعراء الحسين عليه السلام](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F365_adab-altaff-04%2Fimages%2Fcover-big.jpg&w=640&q=75)

