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يا جبرئيل، حقّ القول من الله بحتم |
٣ |
٢٧١ |
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يا جبل، أيعتصم بك مني |
١ |
٦٠ |
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يا شعيب، إلى متى يكون هذا |
١ |
١٠٨ |
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يا عبادي، إنّي لم أخلق الخلق |
١ |
٢٧ |
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يا محمّد، إنّ الله يقرؤك السلام |
١ |
٣١٦ |
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يامحمّد، أنت عبدي وأنا ربّك |
١ |
١٥ |
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يا محمّد، صلّى الله عليك فقد أرسلت |
١ |
٢٤٥ |
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يا محمّد، لم أترك الأرض إلاّ |
١ |
٣٧٦ |
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يا محمّد! مدّ يدك فيتلقّاك ماء |
١ |
٢٠٩ |
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يا محمّد، هذه وصيّتك إلى النجيب |
١ |
٣٣٠ |
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يا موسى، أعطها ما سألت فإنّك |
١ |
١٧٤ |
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يا موسى، أما علمت أنّ فضل آل محمّد |
٣ |
٨ |
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يا موسى، أما علمت أن فضل اُمّة محمّد |
٣ |
٨ |
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يا موسى، أما علمت أنّ محمّداً أفضل |
٣ |
٨ |
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يا موسى بن عمران، أتدري لم اصطفيتك |
١ |
١٠٧ |
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يا موسى، لا تفرح بكثرة المال، ولا تدع |
١ |
١٥٤ |
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يا نوح، إننّي خلقت خلقي لعبادتي |
١ |
٥٨ |
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![علل الشرائع والأحكام والأسباب [ ج ٤ ] علل الشرائع والأحكام والأسباب](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F4516_elal-alsharae-va-ahkam-va-asbab-04%2Fimages%2Fcover.jpg&w=640&q=75)
