|
|
الفرقان |
١٩٣ |
١ / ٣٤٣ ، ٢ / ٥١١ |
|
٢ |
٢ / ٤٦٦ |
١٩٨ |
٢ / ٢٧٩ |
|
١٣ |
١ / ٦٩ |
٢١٢ |
٢ / ٢٤٤ |
|
٢١ |
٢ / ١١ |
٢١٤ |
٢ / ٥٤١ |
|
٢٥ |
٢ / ٢٦٣ |
٢٢٤ |
٢ / ٤٢٥ |
|
٣٢ |
١ / ١٨ |
النمل |
|
|
٣٨ |
١ / ٢٨٦ |
١٤ |
١ / ٣٨٤ |
|
٦١ |
٢ / ٤٥٧ |
١٨ |
٢ / ٣٢ |
|
٦٨ |
١ / ٣٦٥ |
١٩ |
٢ / ٢٧٧ |
|
٧٥ |
٢ / ٢٢٠ |
٢٢ |
١ / ٢٤٣ |
|
|
الشّعراء |
٣٨ |
٢ / ٢٢٩ |
|
٣٧ |
١ / ١٩٩ |
٤٤ |
١ / ١٩٨ |
|
٤٧ |
٢ / ٤٤ |
٥٥ |
٢ / ١٩٢ |
|
٤٨ |
٢ / ٤٤ |
٥٩ |
١ / ٢٦٥ |
|
٥٠ |
١ / ١١٨ |
٦٣ |
١ / ٢٦٥ |
|
٥٩ |
١ / ١٠٣ |
٧٠ |
١ / ٣٦١ |
|
٦١ |
٢ / ١٦١ |
٧٢ |
١ / ٢٢٨ |
|
٦٣ |
١ / ٥٦ |
٨١ |
١ / ٢٤٢ |
|
٧١ |
١ / ٧٤ |
٨٧ |
١ / ٣٧٤ |
|
٧٤ |
٢ / ٢٥١ |
٨٩ |
١ / ٢٤٢ ، ٢٨٤ |
|
٧٩ |
١ / ٨٠ |
|
القصص |
|
٨٠ |
١ / ٨٠ |
٢٦ |
٢ / ١٨ |
|
١٥٠ |
١ / ١١٢ |
٢٩ |
٢ / ٢٨ |
|
١٣٠ |
١ / ٦١ |
٣٠ |
٢ / ٣٣٠ |
|
١٥٣ |
٢ / ٤٥ |
٣٠ |
١ / ٢٧٨ |
|
١٥٥ |
٢ / ٣٤٦ |
٣٧ |
١ / ١٧٠ |
|
١٥٨ |
٢ / ٤٥ |
٤٥ |
٢ / ١٩١ |
|
١٧٦ |
١ / ٣٥٠ |
٤٨ |
١ / ٢٦٠ |
|
٨٤ |
٢ / ٢٣٨ |
٦٠ |
١ / ١٥٥ |
|
١٨٩ |
٢ / ٢٣٥ |
١٩٣ |
١ / ٣٤٣ ، ٢ / ٥١١ |
٥٦٤
![إعراب القراءات السبع وعللها [ ج ٢ ] إعراب القراءات السبع وعللها](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F4213_irab-alqarat-alsabe-02%2Fimages%2Fcover.jpg&w=640&q=75)
