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مطلع البيت |
القافية |
الصفحة |
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كُمَيْتاً تَكَشَّفُ |
إزبادها |
٣٧٣١ |
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ولقد لقيت |
شدادها |
٣٤٦٩ |
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تُزجيْ أَغنَّ |
مِدادَها |
٢٦٦٦ |
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غلب المساميحَ |
وسادها |
٣١٩٣ |
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تؤم سلامةُ |
لميعادها |
١٢٨٧ |
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وكم دون |
وإعقادها |
٣٦٣٣ |
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عرف الديار |
أبلادها |
٦١٢ |
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ومثلكِ معجبةٍ |
بأجلادها |
٣٨٧٨ |
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أميطى أميطى |
كَنَّادِها |
٥٩١٢ |
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فلن يطلبوا |
لإزهادها |
٢٨٦٤ |
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بأنقع مني |
جوادها |
١٢١٦ |
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ويَهماءَ كالليلِ |
فَيَّادها |
٩٦٩ ، ٥٢٩٠ ، ٧٣٨٦ |
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فلو كان من |
خُدُوُدَها |
١٧٥٩ |
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لهم كان مُلْكُ |
يقُودُهَا |
١٧٥٩ |
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فَدَتْه المطايا |
جلودُها |
١٥١٦ |
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فباتت تعد |
جمودها |
١٦٥٥ |
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فجاءت بمثل |
شهودها |
٣٥٦٣ |
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لعمري لقد |
كؤودها |
٥٩٤٥ |
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ألا تلكَ |
يؤُودُها |
٣٥٨ |
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أقيمُهُ تارةً |
قائدُها |
٥٢٦٥ |
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لقد ولدت |
جِيدُها |
٨٧٣ |
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من البيضِ لا تَخْزى |
جيدُها |
١٧٩١ |
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لأمكمُ الويلاتُ |
عديدُها |
٣٨٠١ |
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وصهباء منها |
عديدها |
٦٦٣٨ |
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جُنِنَّا بليلى |
نريدها |
٩٥٩ |
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فلما سقيناها |
وَريدُها |
٢٤٩ ، ٤٦٩٤ ، ٦٢٥٩ |
![شمس العلوم [ ج ١٢ ] شمس العلوم](/_next/image?url=https%3A%2F%2Flib.rafed.net%2FBooks%2F1473_shams-alolom-12%2Fimages%2Fcover.jpg&w=640&q=75)
